गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला ने केंद्र तथा राजस्थान सरकार पर समय बिताने की तरकीब अपनाने का आरोप लगाया है।
भरतपुर के कारवाड़ी गांव में डेरा डाल कर बैठे बैंसला ने कहा प्रधानमंत्री कार्यालय ने यह मुद्दा विधि मंत्रालय के पास भेज दिया है। यह केंद्र और राजस्थान सरकारों की समय बिताने की तरकीब है।
बैंसला से राजे का वह पत्र प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा विधि मंत्रालय को भेजे जाने के बारे में प्रतिक्रिया मांगी गई थी जिसमें राजे ने गुर्जरों के लिए अलग कोटे की मांग की थी।
बैंसला ने कहा आंदोलन तब ही खत्म होगा जब गुर्जरों को अनुसूचित जनजाति का दर्जा दे दिया जाएगा। बैंसला ने राजस्थान सरकार से समुदाय की मांग के बारे में केंद्र सरकार को स्पष्ट एवं तथ्यपरक रिपोर्ट भेजने के लिए कहा। इस मुद्दे पर मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री शिवराज पाटिल की अध्यक्षता में एक बैठक हुई जिसमें आंतरिक सुरक्षा मामलों के विशेष सचिव एमएल कुमावत तथा दिल्ली पुलिस प्रमुख वाइ एस डडवाल ने भी भाग लिया। समझा जाता है कि पाटिल ने प्रधानमंत्री को स्थिति से अवगत कराया है।
गुर्जर बंद का असर, कमजोर रहा कारोबार : दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में गुर्जर नेताओं के चक्का जाम की धमकी से बृहस्पतिवार को चालानी व्यापारी कम आए। इससे स्थानीय मंडियों में कारोबार कमजोर रहा। जबकि आवागमन पर विशेष प्रभाव नहीं पड़ा। मांग के अभाव में गेहूं 5/6 रुपये, तुअर-मूंग, मोटी मसूर 50 रुपये, उडद 20/25 रुपये, सरसों व इसका तेल 25/50 रुपये प्रति क्विंटल एवं कालीमिर्च दो रुपये किलो टूट गए। वहीं छोटी मसूर उत्पादक मंडियों में पडते से 75/80 रुपये ऊंची होने से यहां 50 रुपये तेज हो गई। अनाज-दाल, किराना-मेवे एवं तेल बाजार के अलावा अलौह धातुओं में मंदे का रुख देखा गया। यूपी के मेरठ में स्टॉक सीमा एवं चंदौसी मंडी टैक्स के विरोध में आज भी बंद रहीं।
अनाज-दाल
लारैंस रोड, नजफगढ, नरेला, समयपुर-बादली सहित लोकल मंडियों में गेहूं की किसानी आवक घटकर चार-पांच हजार बोरी रह गई क्योंकि गुर्जर आंदोलन के चलते किसान भी ट्रालियों से माल बहुत कम लाए थे। वहीं चालानी एवं लोकल में गेहूं उत्पादों का लदान भी नहीं के बराबर होने से रोलर फ्लोर मिलों ने गेहूं की खरीद काफी कम की, जिससे 5/6 रुपये घटकर इसके भाव 1070/1074 रुपये प्रति क्विंटल रह गए। दलहनों में तुअर विगत तीन-चार दिनों की तेजी के बाद ग्राहकी कमजोर होने से 50 रुपये घटकर महाराष्ट्र की 2750/2775 रुपये एवं नई लेमन 2625 रुपये रह गई। मूंग भी मांग के अभाव में 50 रुपये और टूट गई। मोटी मसूर बिल्टी में बीनागंज लाइन में 100 रुपये गिरकर 3250 रुपये रह जाने से यहां भी 3350 रुपये पर 100 रुपये नीचे आ गई। वहीं छोटी मसूर सीकरी लाइन में लूज में 3450 रुपये बिक जाने से यहां 50 रुपये बढकर 3600 रुपये पर पहुंच गई। दाल एवं मलका हल्की क्वालिटी में 100 रुपये का मंदा आ गया। उडद भी 15/20 रुपये मुलायम रहा।
अब मीणाओं ने भी मांगा आरक्षण : राजस्थान के गुर्जर आरक्षण आंदोलन की लपटें मध्यप्रदेश में फैलने के बाद अब प्रदेश का मीणा समुदाय अनुसूचित जनजाति (एसटी) के दर्जे की मांग की साथ लामबंद होता दिख रहा है। समुदाय के एक संगठन ने प्रदेश में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी को दो टूक चेतावनी भी दी है कि मांग पूरी न होने पर अगले विधानसभा चुनावों में उससे कन्नी काट ली जाएगी।
आरक्षण संघर्ष समिति के अध्यक्ष भरत मीणा ने बृहस्पतिवार को इंदौर में संवाददाता सम्मेलन में दावा किया कि मध्यप्रदेश में समुदाय के चालीस लाख से ज्यादा लोग बसते हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर बेरोजगारी और गरीबी के बोझ तले दबे हैं।
उन्होंने कहा कि समुदाय की हालत सुधारने के लिए दूसरे राज्यों की तर्ज पर इसे एसटी का दर्जा दिया जाना बेहद जरूरी है। फिलहाल मीणा समुदाय प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के दायरे में आता है। मीणा के मुताबिक विदिशा जिले की सिरोंज और लहेरी तहसील में समुदाय को एसटी का दर्जा प्राप्त है। उनका संगठन चाहता है कि समूचे प्रदेश में यही व्यवस्था लागू हो। उन्होंने कहा कि हम लंबे वक्त से समुदाय को एसटी का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इसे तवज्जो नहीं मिली। मौजूदा भाजपा सरकार ने अगर इस सिलसिले में फौरन ठोस कदम नहीं उठाए तो हम आने वाले विधानसभा चुनावों में पार्टी बहिष्कार कर देंगे।
गुर्जर आंदोलन से पर्यटन उद्योग संकट में: राजस्थान में जारी गुर्जर आंदोलन के कारण विश्व प्रसिद्ध ताजनगरी में ऐतिहासिक इमारतों का दीदार करने वाले सैलानियों की संख्या में प्रतिदिन भारी कमी आ रही है। सूत्रों ने बताया कि फतेहपुर सीकरी का पूरा पर्यटन उद्योग आगरा-जयपुर मार्ग पर जाने वाले पर्यटकों पर निर्भर करता है, जहां एक सप्ताह पहले विदेशी सैलानियों की संख्या 300 तक थी अब यह घटकर 20 तक जा पहुंची है। सिकंदरा और विश्व प्रसिद्ध ताजमहल में जयपुर-आगरा मार्ग बंद होने से पर्यटको की संख्या में 60 प्रतिशत की कमी आई है।
आंदोलन की वजह से होटल तथा रेस्तरां सूने पड़े हैं। सैलानियों के कार्यक्रम निरस्त होने से पिछले तीन दिनों से अनेक खानसामाओं की भट्टी नहीं जल सकी है। आगरा-जयपुर मार्ग पर रोडवेज की बसें नहीं चलने से यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी है।
आंदोलन का रेलवे पर भी व्यापक प्रभाव पड़ा है। आगरा मंडल से गुजरने वाली ट्रेनों का मार्ग परिवर्तित कर दिया गया है। रेलवे ने आगरा फोर्ट, बांदीकुई, बयाना, मथुरा तथा अलवर मार्ग को बंद कर दिया है। इस मार्ग से गुजरने वाली सभी गाड़ियों को निरस्त कर दिया गया है।
रेलवे के एक प्रवक्ता ने बताया कि रेलवे ने अभी तक यात्रियों को 87 लाख रुपये से अधिक रुपयों की वापसी की है।आंदोलनकारियों ने भी कई स्थानों पर रेल पटरियों को क्षतिग्रस्त किया। इरकन भरतपुर रेलवे मार्ग पर उपद्रवी तत्वों ने जमकर हंगामा किया। रेलवे क्रासिंग गेट न0 36 की पटरियों को उखाड़कर लोग ले गए लगभग छह फीट रेल पटरियां गायब पाई गईं। बाद में उसे दुरस्त किया गया।
गुर्जर आंदोलन : सरकार पर बेरुखी का आरोप : अनुसूचित जनजाति में आरक्षण की मांग को लेकर गुर्जर आन्दोलन आठवें दिन में प्रवेश कर गया। इस दौरान राजस्थान सरकार द्वारा आंदोलन समाप्ति की दिशा में कोई ठोस प्रयास नहीं किए जाने के कारण आंदोलन की आग राज्य के अन्य हिस्सों में भी फैलती जा रही है। राजस्थान गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के प्रवक्ता डॉ रूप सिंह ने राजस्थान सरकार पर बेरुखी बरतने और आन्दोलन के समाधान में रुचि नहीं दिखाने का आरोप लगाया।
गुर्जर आन्दोलनकारियों से बातचीत शुरू करने तथा पुलिस फायरिंग में मारे गए लोगों के पोस्टमार्टम को लेकर भी असमंजस बना हुआ है। अनुसूचित जनजाति में आरक्षण की सिफारिश की चिट्ठी केन्द्र सरकार को भेजे जाने की मांग को लेकर राज्य के दस शहर बंद हैं। बंद के दौरान सवाई माधोपुर के कुशालीपुरा दर्रा से निकल रहे अंतरराज्यीय सड़कमार्ग पर जाम के दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों में हुई झड़प में दो पुलिसकर्मियों सहित पांच लोगों के घायल होने की सूचना है।
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